IC कैसे बनाते है ?| Integrated Circuit Fabrication क्या है ?

Integrated circuit

Integrated Circuit (IC)

Integrated Circuit (IC) को Chip या Microchip भी कहा जाता है, यह एक Semiconductor Wafer है जिसमें लाखों Components का Fabrication किया जाता है।यह Active और Passive Components जैसे Resistor, Diode, Transistor आदि और बाहरी कनेक्शन आमतौर पर Silicon के बेहद छोटे single chip पर बनाए जाते हैं। सभी Circuit Component और उसके अन्दर का कनेक्शन  एक पतले Wafer(substrate) पर बनते हैं, जिन्हें Monolithic IC कहा जाता है। IC आकार में बहुत छोटा होता है। Components के बीच Connection को देखने के लिए Microscope की आवश्यकता होती है। IC Chip को Fabricate करना  Transistor, Diode आदि को Fabricate  करने के समान हैं। IC Chip में Transistor, Diode, Capacitor आदि जैसे circuit तत्वों का निर्माण और उनके अंदर का कनेक्शन  एक ही समय में किए जाते हैं।

इसके बहुत सारे फायदे हैं जैसे कि बहुत छोटे आकार, कम वजन, कम लागत, कम बिजली की खपत, High processing speed, बदलने मे आसानी, आदि। IC  सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्रमुख Component है। IC एक Amplifier, Oscillator, Timer, Counter, Computer memory आदि के रूप में काम कर सकता है।

Integrated circuit कैसे बनाते है ?

Steps for I.C. Integrated circuit Fabrication: 

Integrated Circuit (IC) के निर्माण में निम्नलिखित Steps होते हैं। Steps में 8-20 pattern वाली layer शामिल की जाती है जो पूरी Integrated Circuit (IC) बनाती हैं। Wafer की सतह पर  इस layer के कारण विद्युत सक्रिय रूप से Circuit मे बेहता है। एक पतले Silicon पर सैकड़ों Integrated Circuit बनाए जा सकते हैं। फिर इसे एक-एक IC Chips में काट दिया जाता है।

Step 1 : Wafer उत्पादन

पहला step Wafer उत्पादन करना है। Wafer Silicon जैसे Semiconductor material का एक गोल टुकड़ा है। Silicon अपनी विशेषताओं के कारण पसंद किया जाता है। यह IC निर्माण के लिए अधिक उपयुक्त है। यह पूरे chip के लिए Base है। पहले शुद्ध poly-crystalline silicon रेत(sand) से बनाया जाता है। फिर पिघले हुए liquid उत्पादन करने के लिए इसे गर्म किया जाता है। Solid Silicon का एक छोटा टुकड़ा पिघले हुए liquid पर डुबोया जाता है। फिर Solid silicon (seed) धीरेधीरे पिघले हुए liquid से खींचा जाता है। Single crystal ingot बनाने के लिए liquid को ठंडा किया जाता है। Wafer slicer का उपयोग करके Silicon का एक पतला गोल wafer काटा जाता है। Wafer Slicer एक सटीक cutting machine है और प्रत्येक slice में 0.01 से लेकर 0.025 Inch तक की मोटाई होती है। जब wafer काटा जाता है, तो सतह damage होता है इसे Polish करके चिकना किया जाता है। Wafer को चमकाने के बाद, इसे अच्छी तरह से साफ और सुखाया जाता हैSilicon wafers शुद्ध oxygen के संपर्क में होता है

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Step 2 : Masking

दूसरे क्षेत्र में काम करते समय wafer के कुछ area की रक्षा के लिए, photo-lithography नामक एक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। Photo-lithography की प्रक्रिया में photographic mask और photo etching के साथ masking शामिल है। Wafer  पर एक photo-resist film लगाई जाती है। Photo aligner का उपयोग करके wafer को mask से जोड़ा जाता है। फिर इसे mask के माध्यम से Ultraviolet light के संपर्क में लाया जाता है। इससे पहले wafer को मास्क के साथ संरेखित किया जाना चाहिए। आमतौर पर, संरेखण उद्देश्य के लिए automatic tools होते हैं।

Step 3 : Etching

यह patterns बनाने के लिए materials को wafers की सतह से चुनिंदा रूप से हटाया जाता है। Parts की material को Etching mask द्वारा protect किया जाता है। Materials के हिस्से इस Etching mask द्वारा सुरक्षित होते है Unmasked material को हटाने के लिए  wet (Chemical) या Dry(physical) etching का उपयोग किया जाता है। एक ही समय में सभी दिशाओं में Etching करने के लिए, Isotropic etching का उपयोग किया जाता है Isotropic etching एक दिशा में तेज है। Wet itching isotropic है, लेकिन itching time को control करना मुश्किल है। Wet itching, material को हटाने के लिए liquid solvents का उपयोग किया जाता है यह Sub-micron feature आकार के साथ pattern transfer करने के लिए Suitable नहीं है। यह Materials को नुकसान नहीं पहुंचाता है। Material को हटाने के लिए Dry Itching gases का उपयोग किया जाता है यह an-isotropic है। लेकिन यह कम चयनात्मक है। यह छोटे आकार वाले pattern को स्थानांतरित करने के लिए उपयुक्त है। जो Photo resistance रह गया है उसको  को अंततः अतिरिक्त chemical या plasma का उपयोग करके हटा दिया जाता है। फिर Wafer का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि image को mask से wafer की ऊपरी layer में transfer किया गया है की नहीं

Step 4 : Doping

Silicon के electrical character को बदलने के लिए, Boron जैसे SILICON की तुलना में एक कम Electron वाले atom और एक electron से अधिक वाले atom जैसे phosphorous को क्षेत्र में पेश किया जाता है। P-type (Boron) और N-type (Phosphorous) उनकी संचालन विशेषताओं को दर्शाने के लिए बनाए गए हैं। उच्च तापमान पर semiconductor material में अशुद्ध atom की गति के रूप में Diffusion को परिभाषित किया गया है।

Atomic Diffusion

इस Method में P और N क्षेत्रों को wafer में Dopant जोड़कर बनाया जाता है। Wafers को एक oven में रखा जाता है जो Quartz से बना होता है और यह heating elements से घिरा होता है। तब wafers को लगभग 1500-2200 ° F के तापमान पर गर्म किया जाता है।अक्रिय गैस में Dopent chemical होता है। Dopent और गैस को wafers के माध्यम से pass किया जाता है और अंत में Dopent wafer पर जमा हो जाता है। इस पद्धति का उपयोग केवल बड़े क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है। छोटे क्षेत्रों के लिए यह कठिन होगा और यह सटीक नहीं भी हो सकता है।

Ion Implantation

यह भी Dopent को जोड़ने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक method है। इस method में, Dopant gas जैसे कि phosphane या Boron Tri-chloride को पहले ionize किया जाता है फिर यह wafer के निर्दिष्ट क्षेत्रों में high energy Dopent ions की एक किरण प्रदान करता है। यह wafer में प्रवेश करता है प्रवेश की गहराई Beam की energy पर निर्भर करती है। Beam energy को बदलकर, dopant के प्रवेश की गहराई को wafer में नियंत्रित करना संभव है। Dopent की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए beam को वर्तमान और connection के समय मे उपयोग किया जाता है। यह विधि atomic diffusion प्रक्रिया को धीमी करता है इसे masking की आवश्यकता नहीं है और यह प्रक्रिया बहुत सटीक है। सबसे पहले यह Wafer को इंगित करता है कि जहां इसकी आवश्यकता है और Dopant को उस स्थान पर शूट करें जहां इसकी आवश्यकता है।

Step 5 : Matellization

इसका उपयोग Silicon के साथ संपर्क बनाने और Chip के अंदर का connection बनाने के लिए किया जाता है। पूरे Wafer पर Aluminum की एक पतली परत जमा हो जाती है। Aluminum का चयन किया जाता है क्योंकि यह एक अच्छा conductor है, silicon के साथ अच्छा mechanical bond बनता  है, कम resistance contact बनाता है और इसे single deposition और etching process के साथ लागू और pattern किया जा सकता है।

Successive layer बनाना : – कई प्रक्रिया जैसे कि masking, doping, etching प्रत्येक successive layer के लिए दोहराया जायेगा जब तक कि सभी Integrated Chip पूरा नहीं हो जाते। Component के बीच, Silicon-Dioxide को insulator के रूप में उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया को Chemical vapor Deposition कहते हैं। Contact pad बनाने के लिए, Aluminum जमा किया जाता है। Fabrication में Dielectric layer  द्वारा अलग की गई तीन से अधिक परतें शामिल होती हैElectrical और Physical isolation के लिए प्रत्येक component में solid dielectric की एक परत घिरी होती है जो isolation प्रदान करती है। एक ही silicon substrate में PNP और NPN Transistor बनाना संभव है। सर्किट के नुकसान और संदूषण से बचने के लिए, अंतिम Dielectric layer (passivation) चराई जाती है। उसके बाद, individual IC Integrated Circuit  का electrical function के लिए test किया जाता हैWafer पर प्रत्येक Chip की function की जाँच करने के बाद ,जो Chip टेस्ट में पास नहीं होंगे उन्हें Reject कर दिया जाता है

Assembly and packaging

प्रत्येक Wafers में सैकड़ों chips होते हैं। इन chips को अलग किया जाता है और एक विधि द्वारा pack किया जाता है जिसे scribing और cleaving कहा जाता है।Wafer कांच के टुकड़े के समान है। एक diamond saw Wafer को single Chips में काट देता है Diamond tipped tool का उपयोग आयताकार grid के माध्यम से लाइनों को काटने के लिए उपयोग  किया जाता है जो अलगअलग Chips को अलग करता है। Electrical test में विफल रहे chips को छोड़ दिया जाता है।Packaging से पहले, शेष Chips को  microscope के तहत देखे जाते हैं। फिर अच्छी chip को एक package में रखा जाता है। Ultrasonic Bonding का उपयोग करके पतले तार जुड़े जाते हैं। ग्राहक को वितरित करने से पहले, chip का फिर से परीक्षण किया जाता है।Packaging तीन तरह से किया जाता है metal can package, ceramic flat package और dual in line package Military application के लिए, chip को ceramic package में assemble किया जाता है। Complete Integrated Circuit को anti-static Plastic Bag में seal कर दिया जाता है।

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IC के प्रकार

  1. Digital Integrated Circuits
  2. Analog Integrated Circuits
  3. Mixed Integrated Circuits
  4. Logic Circuits
  5. Comparators
  6. Switching ICs
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SL. Number

Classification of IC

1

SSI: Small scale integration. 3 – 30 gates per chip

2

MSI: Medium scale integration. 30 – 300 gates per chip

3

LSI: Large scale integration. 300 – 3,000 gates per chip

4

VLSI: Very large scale integration. More than 3,000 gates per chip

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